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रोहिणी कोयला स्टॉक में भीषण आग: एक सप्ताह से धधकता लाखों टन कोयला, करोड़ों की संपत्ति पर संकट।।

"प्रबंधन की तैयारी पर उठे सवाल, संसाधनों की कमी और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर आरोप"

IMG 20260429 22120516रोहिणी कोयला स्टॉक में भीषण आग: एक सप्ताह से धधकता लाखों टन कोयला, करोड़ों की संपत्ति पर संकट।।

“प्रबंधन की तैयारी पर उठे सवाल, संसाधनों की कमी और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर आरोप”

रिपोर्टर/राशीद अंसारी

खलारी। सीसीएल एनके एरिया की रोहिणी परियोजना एक गंभीर संकट से जूझ रही है, जहां कोयला स्टॉक में लगी आग पिछले एक सप्ताह से लगातार जारी है। स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि बड़ी मात्रा में कोयला जलकर नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे राष्ट्रीय संपत्ति को भारी नुकसान हो सकता है। स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, आग पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है और धुएं व तापमान के कारण आसपास का क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है।

“बार-बार उठ रहे सुरक्षा और प्रबंधन पर सवाल”

सूत्रों का दावा है कि जिस स्थान पर पहले भी आग लग चुकी है, वहां दोबारा कोयला डंप किया गया, जिससे लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप सामने आ रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि आग बुझाने के लिए आवश्यक आधुनिक उपकरण और पर्याप्त क्षमता वाली मशीनों की कमी के कारण हालात और बिगड़ते चले गए।

“संसाधनों की कमी से बढ़ी मुश्किलें”

खान सुरक्षा से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि पर्याप्त फायर फाइटिंग सिस्टम और हाई-कैपेसिटी पंपों की कमी के चलते आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई जरूरी वाहन और उपकरण तकनीकी खराबी के कारण उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं।

“स्थानीय स्तर पर बढ़ा आक्रोश”

इस घटना को लेकर श्रमिकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी आग के बावजूद समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, जिससे नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है।

“स्थिति गंभीर, जांच और कार्रवाई की मांग”

फिलहाल आग पर नियंत्रण के प्रयास जारी हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि शीघ्र और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी गंभीर हो सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि उच्च प्रबंधन इस पूरे मामले को किस गंभीरता से लेता है और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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